रंग लिया मोहे रंग लिया मोहे अपने लहू में रंग लिया
येशु ने दिया अपना मास्सा दिया अपना ज़ेहन मुझे अपना रूप दिया
दिया जीने को रंग, रूहे पाक किया संग चौपान बनाओ इक अजब ख़ुशी इक अनोखा मज़ा, दिलो जान बनाओ संग लिया मोहे संग लिया
वो ही प्यार का रूप, चाहे छाओं या धुप येशु है खुदा वो ही देता है फल उसमें नहीं छल, येशु है वफ़ा मांग लिया मोहे मांग लिया
अब जीना मसीह और मरना नफा जाप्ता हूँ यही येशु के बिना जीना क्या जीना कहता हूँ यही अंग लिया मोहे अंग लिया